Delhi Gurugram Elevated Road : दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर रोज़ का भीषण जाम कम करने के लिए एक नए एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट की तैयारी तेज हो गई है। सरहौल बॉर्डर से साइबर हब और उद्योग विहार की ओर जाने वाले वाहनों के लिए नवंबर से निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। इस परियोजना से ऑफिस जाने वालों, लॉजिस्टिक वाहनों और रोज़ाना सफर करने वालों को काफी राहत मिल सकती है।
कहां बनेगा एलिवेटेड रोड
यह एलिवेटेड रोड सरहौल बॉर्डर से साइबर हब तक के व्यस्त हिस्से को कवर करेगा। इस रूट पर सुबह और शाम के समय वाहनों की भारी भीड़ रहती है, जिससे दिल्ली से गुरुग्राम और गुरुग्राम से दिल्ली आने-जाने में कई घंटे बर्बाद होते हैं। नया ऊंचा रास्ता यातायात को जमीनी सड़क से अलग कर देगा, जिससे सिग्नल और लोकल ट्रैफिक का असर कम होगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, DLF इस प्रोजेक्ट का निर्माण करेगी और इस महीने के अंत तक ड्रॉइंग तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद नवंबर से जमीनी स्तर पर काम शुरू किया जा सकता है। प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ सड़क बनाना नहीं, बल्कि सरहौल से साइबर हब तक के यातायात दबाव को व्यवस्थित रूप से घटाना है।
यातायात को कैसे मिलेगा फायदा
एलिवेटेड रोड बनने के बाद साइबर हब, उद्योग विहार और आसपास के कॉर्पोरेट ऑफिस जाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। इससे दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर पीक ऑवर्स में लगने वाला जाम कम होगा और वाहनों की औसत गति बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा, एयरपोर्ट, द्वारका एक्सप्रेसवे और गुरुग्राम के मुख्य व्यावसायिक इलाकों से जुड़ने वाले रूट पर भी दबाव घट सकता है।
गुरुग्राम में इसी तरह के बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट पहले से चल रहे हैं। दक्षिणी परिधीय सड़क यानी SPR पर वाटिका चौक से द्वारका एक्सप्रेसवे तक 4.23 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का टेंडर जारी किया जा चुका है, जिसकी अनुमानित लागत 776 करोड़ रुपये है। यह प्रोजेक्ट भी शहर के अंदरूनी और बाहरी यातायात को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
निर्माण में क्या चुनौतियां
बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में यूटिलिटी शिफ्टिंग सबसे बड़ी बाधा बनती है। पानी, सीवर और स्टॉर्मवाटर पाइपलाइनों को पहले हटाना पड़ता है, वरना निर्माण कार्य धीमा पड़ सकता है। गुरुग्राम में मेट्रो कॉरिडोर के काम से भी इसी तरह की चुनौती सामने आ रही है, जिससे समय पर यूटिलिटी शिफ्टिंग का महत्व और बढ़ जाता है।
निर्माण के दौरान कुछ समय के लिए ट्रैफिक डायवर्जन और लेन कटौती से लोगों को असुविधा हो सकती है। हालांकि, एक बार प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद रोज़ाना की देरी, ईंधन की खपत और प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।
आगे की उम्मीद
सरकार और निजी एजेंसियों की ओर से गुरुग्राम के ट्रैफिक समस्या को लेकर लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। एलिवेटेड रोड के साथ मेट्रो विस्तार और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी मिलकर शहर के परिवहन नेटवर्क को मजबूत करेंगे।
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अगर नवंबर से काम समय पर शुरू हो जाता है, तो आने वाले महीनों में दिल्ली-गुरुग्राम सफर की स्थिति में सुधार की उम्मीद बढ़ जाएगी।
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