Rajasthan railway news : राजस्थान के रेल नेटवर्क को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अजमेर से चंदेरिया रेल खंड पर 178.28 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाई जाएगी, जिससे यह खंड दोहरा हो जाएगा। इस परियोजना के लिए रेलवे को रास्ते के किसानों और अन्य भूमिधारकों से जमीन अधिग्रहण करनी होगी, जिसके बदले उन्हें बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
अजमेर-चंदेरिया दोहरीकरण परियोजना की कुल लागत ₹1,635 करोड़ आंकी गई है। इस प्रोजेक्ट को केंद्रीय रेल मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी में भी शामिल किया गया है, जिससे साफ है कि यह केवल स्थानीय स्तर की योजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रेल विस्तार का हिस्सा है।
कहां बिछेगी नई रेल लाइन?
यह रेल लाइन अजमेर से चंदेरिया के बीच 178.28 किलोमीटर के खंड पर बिछाई जाएगी। फिलहाल इस रूट पर सिंगल रेल लाइन है, जिसकी वजह से ट्रेनों की आवाजाही सीमित रहती है। दूसरी पटरी बनने के बाद यह खंड दोहरा हो जाएगा और ट्रेनों की क्षमता तेजी से बढ़ेगी।
दोहरीकरण के दायरे में बडगांव, परबतपुरा, धोक मालियान, तृतीय जोन्सगंज से आदर्श नगर पुरानी चुंगी रेलवे फाटक तक के इलाके आते हैं। इसके अलावा हटूण्डी क्षेत्र में कृषि, आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोग की जमीन भी प्रभावित हो सकती है।

जमीन के बदले कैसे मिलेगा मुआवजा?
रेलवे विभाग ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी है। अजमेर के उपखंड अधिकारी ने उप पंजीयकों से संबंधित क्षेत्र की जमीन की डीएलसी दरें और बाजार मूल्य की जानकारी मांगी है। इसी आधार पर मुआवजे का निर्धारण किया जाएगा।
मुआवजा रेलवे अधिनियम 1989, जिसमें 2008 का संशोधन शामिल है, की धारा 20जी के तहत तय होगा। इसका मतलब है कि जमीन का मूल्य उसके उपयोग—कृषि, आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक—के हिसाब से निर्धारित होगा।
किसानों को कितना फायदा?
रिपोर्ट के अनुसार, इस रेल लाइन के रास्ते में आने वाली जमीन देने वाले हजारों किसानों को करोड़ों रुपये का मुआवजा मिल सकता है। हालांकि, हर किसान को कितना मुआवजा मिलेगा, यह उसकी जमीन के प्रकार, लोकेशन और बाजार मूल्य पर निर्भर करेगा।
जमीन के अलावा कुएं, ट्यूबवेल और अन्य संरचनाओं से प्रभावित लोगों को भी मुआवजे के दायरे में लाया जा सकता है। इससे स्थानीय किसानों को थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन मुआवजे की राशि और भुगतान की समयसीमा पर सरकारी स्तर पर पारदर्शिता जरूरी होगी।
दोहरी लाइन से क्या बदलाव आएगा?
अजमेर-चंदेरिया खंड पर दूसरी पटरी बनने से ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी। अभी सिंगल लाइन होने की वजह से ट्रेनों को एक-दूसरे का रास्ता देने के लिए रुकना पड़ता है, जिससे समय और दक्षता दोनों प्रभावित होते हैं।
दोहरी लाइन बनने के बाद मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की संख्या बढ़ सकती है। इससे राजस्थान के औद्योगिक और खनन क्षेत्रों को माल ढुलाई में भी फायदा मिलेगा। साथ ही यात्रियों को ट्रेनों में जगह और समय पर चलने की सुविधा भी बेहतर होगी।
राजस्थान के रेल विस्तार का हिस्सा है यह प्रोजेक्ट
अजमेर-चंदेरिया दोहरीकरण केवल एक अलग प्रोजेक्ट नहीं है। राजस्थान में कई और रेल परियोजनाएं भी चल रही हैं, जैसे डूंगरपुर-बांसवाड़ा-रतलाम नई लाइन, जिसकी लागत ₹2,083 करोड़ है और इसमें राज्य सरकार और रेल मंत्रालय के बीच 50:50 लागत साझेदारी है।
इसके अलावा धौलपुर-सरमाथुरा-गंगापुर रेल लाइन परियोजना में भी जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया चल रही है। यानी राजस्थान में रेल नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिशें एक साथ कई स्तर पर चल रही हैं।
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स्थानीय लोगों की चिंताएं
जमीन अधिग्रहण में सबसे बड़ी चिंता किसानों की आजीविका और उचित मुआवजे की होती है। कई बार मुआवजे की राशि और भुगतान में देरी से स्थानीय लोगों को परेशानी होती है। इसलिए जरूरी है कि मुआवजे की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो।
इसके अलावा रेल लाइन के कारण खेतों का बंटवारा, पहुंच में कठिनाई और पानी के स्रोतों पर असर जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। इन मुद्दों पर सरकार और रेलवे को पहले से ध्यान देना होगा।
आगे की राह क्या है?
अभी जमीन के बाजार मूल्य का निर्धारण और डीएलसी दरों की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके बाद अवार्ड जारी किए जाएंगे और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।