Rajasthan New Project 2026 : राजस्थान के सीकर जिले की खंडेला तहसील अब राज्य के ऊर्जा और खनन क्षेत्र का नया केंद्र बनने जा रही है। यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) यहां लगभग ₹3,000 करोड़ की लागत से रोहिल यूरेनियम परियोजना विकसित करेगी।
इसके लिए रॉयल, रोहिल और आसपास के गांवों में जमीन अधिग्रहण की तैयारी चल रही है, जिसमें लगभग 500 बीघा से अधिक भूमि शामिल हो सकती है।
यह परियोजना राजस्थान के लिए सिर्फ एक औद्योगिक प्रोजेक्ट नहीं है। यह राज्य को देश की परमाणु ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने वाली एक बड़ी पहल है। अगर यह समय पर पूरी होती है, तो सीकर क्षेत्र की पहचान और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों बदल सकती हैं।

कहां बनेगा यूरेनियम प्लांट?
प्रस्तावित रोहिल यूरेनियम परियोजना सीकर जिले की खंडेला तहसील में बननी है। पर्यावरण स्वीकृति से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, यह परियोजना खंडेला, गोकुल का बास, रॉयल और अग्लोई गांवों के क्षेत्र में आती है। पूरे प्रोजेक्ट के लिए लगभग 1,300 हेक्टेयर जमीन की जरूरत बताई गई है।
इस क्षेत्र में खनन और प्रोसेसिंग प्लांट के साथ टेलिंग पॉन्ड और आवासीय परिसर भी बनाने की योजना है। यानी यह केवल खुदाई का काम नहीं, बल्कि एक पूरे खनन-प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित होगा।
₹3,000 करोड़ का निवेश कहां खर्च होगा?
UCIL इस परियोजना में अनुमानित ₹3,000 करोड़ का निवेश करेगी। यह राशि खनन, प्रोसेसिंग, मशीनरी, परिवहन, सुरक्षा, पर्यावरण प्रबंधन और बुनियादी ढांचे पर खर्च होगी।
इतने बड़े निवेश से सीकर क्षेत्र में निर्माण गतिविधियां, सड़क सुविधाएं, परिवहन और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिल सकता है। प्रोजेक्ट के दौरान ठेकेदारों, सप्लाई एजेंसियों और छोटे व्यापारियों के लिए भी अवसर पैदा होंगे।
500 बीघा जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया
के लिए निजी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम, 2013 के तहत चलाई जा रही है। सरकार का कहना है कि मुआवजा और पुनर्वास इसी कानून के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
स्थानीय किसानों और भूमिधारकों के लिए सबसे अहम सवाल उचित मुआवजा, स्पष्ट पुनर्वास नीति और आजीविका का विकल्प है। जमीन अधिग्रहण में पारदर्शिता ही तय करेगी कि यह प्रोजेक्ट स्थानीय लोगों के लिए अवसर बनेगा या विवाद का कारण।
रोजगार के कितने अवसर?
सरकार ने विधानसभा में बताया था कि इस परियोजना से 1,623 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत पद स्थानीय निवासियों के लिए आरक्षित होंगे।
इसके अलावा निर्माण, परिवहन, सुरक्षा, रखरखाव और सप्लाई से जुड़े अप्रत्यक्ष रोजगार भी बढ़ेंगे। खासकर खंडेला और आसपास के गांवों के युवाओं के लिए यह एक बड़ा अवसर हो सकता है, बशर्ते उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण और नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए।
यूरेनियम क्यों मायने रखता है?
खंडेला में यूरेनियम खनन शुरू होने से राजस्थान देश की परमाणु ऊर्जा आपूर्ति में योगदान देने वाला नया राज्य बन सकता है। इससे राज्य की औद्योगिक पहचान के साथ-साथ निवेश और रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।
पर्यावरण और स्वास्थ्य का सवाल
यूरेनियम खनन में विकिरण, धूल, जल संदूषण और भूजल की गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर विशेष सावधानी जरूरी होती है। इस परियोजना के लिए पर्यावरण स्वीकृति और संबंधित नियमों का पालन अनिवार्य होगा।
स्थानीय निवासियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि खनन से पानी, हवा और स्वास्थ्य पर कोई दीर्घकालिक असर न पड़े। इसके लिए नियमित निगरानी, स्वास्थ्य जांच और पारदर्शी रिपोर्टिंग जरूरी होगी।
स्थानीय लोगों की चिंताएं
खंडेला क्षेत्र में कई लोग इस परियोजना को विकास का अवसर मान रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों को जमीन, पानी और स्वास्थ्य को लेकर चिंता है। खासकर उन किसानों के लिए यह बड़ा सवाल है जिनकी आजीविका खेती और पशुपालन से जुड़ी है।
इसलिए सरकार और UCIL को केवल कागजी घोषणाओं पर नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कदम उठाने होंगे। स्थानीय भर्ती, कौशल प्रशिक्षण, उचित मुआवजा और पारदर्शी संवाद इस प्रोजेक्ट की सफलता की नींव बनेंगे।
राजस्थान के लिए क्या बदलाव आएगा?
अगर यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो शेखावाटी क्षेत्र की पहचान बदल सकती है। अब तक यह क्षेत्र शिक्षा, व्यापार और प्रवासी श्रमिकों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इस प्रोजेक्ट के बाद यह ऊर्जा और खनन क्षेत्र में भी चर्चा में आएगा।
इससे सीकर जिले में नए निवेश, बेहतर सड़कें, परिवहन सुविधाएं और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिल सकती है। हालांकि, यह तभी संभव होगा जब विकास और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बना रहे।
आगे की राह
अभी यह प्रोजेक्ट जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और तकनीकी तैयारी के दौर से गुजर रहा है। अगले कुछ साल तय करेंगे कि यह परियोजना कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और स्थानीय लोगों को कितना लाभ देती है।
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