Indian Railway news : भारतीय रेलवे ने नवंबर और दिसंबर 2026 में दिल्ली, चेन्नई, दादर और भुज समेत कई शहरों को जोड़ने वाली 27 ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया है।
यह बदलाव लूणी-समधारी-भिलड़ी रेल खंड पर दोहरीकरण के लिए फिटिंग और कमीशनिंग कार्य की वजह से किया गया है। इससे कुछ ट्रेनें पूरी तरह रद्द होंगी, कुछ आंशिक रूप से रद्द होंगी, कुछ वैकल्पिक रूट से चलेंगी और कुछ के समय में बदलाव होगा।
यह नोटिस जोधपुर रेल मंडल की ओर से जारी किया गया है। जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि ये अस्थायी बदलाव रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए किए जा रहे हैं और यात्रियों को यात्रा से पहले ट्रेन का समय व रूट जरूर जांचना चाहिए।

क्यों प्रभावित हो रही हैं ट्रेनें?
लूणी-समधारी-भिलड़ी रेल खंड पर दोहरीकरण का काम चल रहा है। इसके तहत फिटिंग और कमीशनिंग का काम किया जा रहा है, जिसके चलते नवंबर और दिसंबर में 27 ट्रेनों का संचालन प्रभावित होगा।
इस काम के दौरान कुछ ट्रेनें पूरी तरह रद्द होंगी, कुछ आंशिक रूप से रद्द होंगी, कुछ वैकल्पिक रूट से चलेंगी और कुछ के समय में बदलाव होगा। यह कदम रेल नेटवर्क को मजबूत और भविष्य में ट्रेनों की क्षमता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
कौन सी ट्रेनें पूरी तरह रद्द होंगी?
रेलवे ने कई ट्रेनों को पूरी तरह रद्द करने की घोषणा की है। इनमें भगत की कोठी-बाड़मेर-भगत की कोठी एक्सप्रेस (14895/14896), भगत की कोठी-भिलड़ी-भगत की कोठी ट्रेन (74841/74842), भुज-दिल्ली-भुज एक्सप्रेस (19403/19404), साबरमती-लालगढ़-साबरमती एक्सप्रेस (19407/19408) शामिल हैं।
इसके अलावा भगत की कोठी-गांधीधाम-भगत की कोठी सुपरफास्ट (22483/22484), भगत की कोठी-बाड़मेर-भगत की कोठी एक्सप्रेस (74839/74840) और भगत की कोठी-पालनपुर-भगत की कोठी एक्सप्रेस (14893/14894) भी प्रभावित होंगी। ये ट्रेनें दिसंबर के पहले हफ्तों में कुछ निर्दिष्ट तारीखों पर रद्द रहेंगी।
कौन सी ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द होंगी?
दो ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द होंगी। पहली 14896 बाड़मेर-भगत की कोठी एक्सप्रेस है, जो 23 नवंबर से 17 दिसंबर तक 25 यात्राओं में समधारी से भगत की कोठी के बीच नहीं चलेगी।
दूसरी 14893 भगत की कोठी-पालनपुर एक्सप्रेस है, जो उसी अवधि में 25 यात्राओं में समधारी से पालनपुर के बीच नहीं चलेगी। यानी ये ट्रेनें कुछ हिस्से तक चलेंगी, लेकिन आगे का सफर रद्द रहेगा।
कौन सी ट्रेनें वैकल्पिक रूट से चलेंगी?
कई ट्रेनें लूणी-मारवाड़ जंक्शन-पालनपुर-मेहसाना रूट की जगह वैकल्पिक रूट से चलेंगी। इनमें जैसलमेर-साबरमती-जैसलमेर सुपरफास्ट (20485/20486) शामिल है, जो 23 नवंबर से 20 दिसंबर तक 28 यात्राओं में बदले रूट से चलेगी।
इसके अलावा जोधपुर-दादर-जोधपुर एक्सप्रेस (14807/14808), हरिद्वार-भावनगर टर्मिनस एक्सप्रेस (19272), दादर-भगत की कोठी सुपरफास्ट (20484), चेन्नई सेंट्रल-भगत की कोठी सुपरफास्ट (20625), श्रीगंगानगर-दादर सुपरफास्ट (20489) और भगत की कोठी-चेन्नई एग्मोर एक्सप्रेस (20626) भी प्रभावित होंगी।
ट्रेनों के समय में बदलाव होगा?
कुछ ट्रेनों के समय में भी बदलाव किया गया है। 14887 ऋषिकेश-बाड़मेर एक्सप्रेस, जो 22 नवंबर को ऋषिकेश से निकलेगी, जोधपुर और लूणी के बीच 45 मिनट के लिए नियंत्रित होगी।
इसके अलावा 74839 भगत की कोठी-बाड़मेर एक्सप्रेस 23 नवंबर को भगत की कोठी से निर्धारित समय से 1.5 घंटे देर से निकलेगी। यात्रियों को इन बदलावों का ध्यान रखना चाहिए।
दक्षिण पश्चिम रेलवे क्षेत्र में भी असर
श्रीगंगानगर से तिरुचिरापल्ली जाने वाली हमसफर सुपरफास्ट एक्सप्रेस 26 अक्टूबर को दक्षिण पश्चिम रेलवे क्षेत्र में भी प्रभावित होगी। टिपटूर और होन्नावल्ली स्टेशनों के बीच लेवल क्रॉसिंग नंबर 88 पर कंपोजिट गर्डर लॉन्चिंग के लिए लाइन ब्लॉक लिया जाएगा।
इसके चलते यह ट्रेन रास्ते में 30 मिनट के लिए नियंत्रित होगी। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे स्टेशन जाने से पहले ट्रेन की स्थिति और संभावित देरी की जानकारी आधिकारिक चैनलों से लें।
यात्रियों के लिए क्या करना चाहिए?
यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से पहले ट्रेन का समय, रूट और स्थिति जरूर जांचें। रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, ऐप या रेल मदद विभाग से नवीनतम जानकारी लेनी चाहिए।
अगर आपकी ट्रेन रद्द हो गई है या वैकल्पिक रूट से चल रही है, तो यात्रा योजना में बदलाव करना पड़ सकता है। इसलिए समय रहते टिकट और यात्रा की जानकारी अपडेट करना जरूरी है।
रेलवे का बड़ा निवेश और सुरक्षा
भारतीय रेलवे ने 2026-27 में अब तक केवल दो गंभीर ट्रेन दुर्घटनाएं दर्ज की हैं, जो सुरक्षा में सुधार का संकेत है। रेलवे ने आधुनिक तकनीक, बुनियादी ढांचे और बेहतर रखरखाव पर बड़ा निवेश किया है।
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कवच संस्करण 4.0 को दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे घने रूटों पर 2,490 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। यह रेल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
आगे की राह
ये बदलाव अस्थायी हैं और रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए किए जा रहे हैं। दोहरीकरण पूरा होने के बाद ट्रेनों की क्षमता और गति बढ़ेगी, जिससे यात्रियों को लंबे समय में फायदा होगा।