Rajasthan Cyber Crime News : राजस्थान में बढ़ते साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए पुलिस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक का सहारा लेने जा रही है। राज्य सरकार ने राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर और AI-सक्षम 1930 साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट, AI वॉयस क्लोनिंग और फर्जी निवेश योजनाओं जैसे अपराधों को जल्दी पकड़ना और पीड़ितों को तुरंत मदद देना है।

AI से बदलेगी जांच की तस्वीर
AI तकनीक से पुलिस बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत, वीडियो, फोन रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन का तेजी से विश्लेषण कर पाएगी। अभी ऐसे मामलों की जांच में हफ्तों या महीनों का समय लगता है, लेकिन AI आधारित टूल्स से संदिग्ध नंबर, खाते और लिंक जल्दी पहचाने जा सकेंगे। राजस्थान पुलिस ने पहली बार लेटरल एंट्री के जरिए AI और डेटा एक्सपर्ट्स की भर्ती को भी मंजूरी दी है, जिससे जांच और भी तकनीकी होगी।
राज्य सरकार AI का इस्तेमाल 190 बैंक शाखाओं और एटीएम लेनदेन की निगरानी के लिए भी करेगी। इससे संदिग्ध निकासी, फर्जी खातों और मनी मुल नेटवर्क को समय रहते पकड़ने में मदद मिलेगी। अलवर पुलिस ने साइबर अपराध की जांच में AI आधारित पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी भी की है।
पुलिस के मुताबिक, अब ठग AI से बनाई गई आवाज और फोटो का इस्तेमाल करके लोगों को निशाना बना रहे हैं। कई मामलों में ठग अपने आप को पुलिस, NIA या परिजन बताकर पैसे की मांग करते हैं। इसलिए AI आधारित सिस्टम से फर्जी कॉल, डीपफेक वीडियो और संदिग्ध डिजिटल पैटर्न को पहचानने में मदद मिलेगी।
जनता के लिए जरूरी सावधानी
राजस्थान के सभी 41 पुलिस जिलों में साइबर थाने स्थापित किए जा चुके हैं और हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क संचालित है। इसके अलावा 1930 साइबर हेल्पलाइन, व्हाट्सएप नंबर 9256001930 और 9257510100 पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। ठगी होने पर जितनी जल्दी शिकायत की जाए, पैसा रोकने की संभावना उतनी ज्यादा रहती है।
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पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे किसी अनजान लिंक, OTP, बैंक विवरण या पासवर्ड को किसी के साथ साझा न करें। वीडियो कॉल या आवाज में अपने परिजन की आपात स्थिति का दावा होने पर भी पैसे भेजने से पहले दूसरे नंबर पर कॉल करके पुष्टि जरूर करें। ऑनलाइन गेमिंग या निवेश के झांसे में भी सतर्क रहना जरूरी है।
कुल मिलाकर, AI तकनीक से राजस्थान पुलिस की साइबर जांच और जनता की सुरक्षा दोनों मजबूत होने की उम्मीद है। लेकिन तकनीक के साथ-साथ जनता की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है, क्योंकि ठग लगातार नए तरीके अपना रहे हैं।
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